जहां
मोदी सरकार पूंजीपतियों पर मेहरबान है, वहीं मेहनतकश जनता को भरमाने के
लिए उसकी नौटंकी है ‘स्वच्छ भारत अभियान’। भाजपा का यह स्वच्छ भारत अभियान
कितना स्वच्छ है यह भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय की झाडू
देखकर लग जाता है। सतीश उपाध्याय ने स्वच्छ भारत अभियान का हिस्सा बनने के
लिए झाडू तो हाथ में ली लेकिन सफाई के लिए उन्होंने पहले कूड़े के नाम पर
पेड़ों की सूखी पत्तियों का कूड़ा मंगाकर फैलाया गया उसके बाद जब मीडिया और
प्रचार का सारा ताम-झाम इकट्ठा हो गया तो सतीश उपाध्याय ने उस कूड़े को
साफ किया। बड़े-बड़े नालों व सीवर की सफाई के लिए कोई राजनेता नालों या गटर
में नहीं उतरे। वे भी प्रचार पाने के लिए इसी तरह की कार्रवाइयों में लगे
रहे। सतीश उपाध्याय व उनके जैसों द्वारा इस तरह की कार्रवाइयां सफाई
कर्मियों का मजाक उड़ाना है। वे ऐसा करके हर साल सफाई करते हुए गम्भीर
बीमारियों के शिकार होकर मरने वालों तथा महानगरों के गटर साफ करने के दौरान
मारे जाने वाले हजारों सफाई कर्मियों की मौत का मजाक उड़ाते हैं।
इसके अलावा इस अभियान के तहत मैला ढ़ोने वालों के पक्ष में किसी प्रकार की सुरक्षा की कोई घोषणा तक सरकार द्वारा नहीं की गई है। बड़े नालों व सीवर की सफाई के लिए किसी प्रकार की नई तकनीक के इस्तेमाल के लिए कोई धन आवंटित नहीं किया गया, जिससे इन सफाई कर्मियों को कुछ राहत मिलती। और तो और लाखों की संख्या में ठेके पर काम कर रहे सफाई कर्मियों को स्थायी करने की घोषण भी नहीं की गई। सफाईकर्मियों की नई भर्तियों की कोई योजना तक नहीं लाई गई। इस तरह से स्वच्छ भारत अभियान, वास्तव में सफाई में लगे सफाई कर्मियों से अपनी दूरी बनाये रखा।
इसके अलावा स्वच्छ भारत अभियान की घोषणा के तुरन्त बाद 20 नवम्बर को हरियाणा के हिसार जिले के गांव रावलवास खुर्द में गर्ल्स हाई स्कूल की हेड टीचर ने अनुसूचित जाति की छात्राओं को शौचालय साफ करने का फरमान सुनाया। स्कूल की हेड टीचर ने तर्क दिया कि क्योंकि ये सभी छात्रायें मुफ्त में छात्रवृत्ति लेती हैं और पूरे भारत में स्वच्छ भारत अभियान चल रहा है। इसलिए अनुसूचित जाति की छात्रायें स्कूल के शौचालय साफ करेंगीं। जब छात्राओं और परिजनों ने स्कूल पहुंच कर इसका विरोध किया तो उन्हें यह कह कर स्कूल से बाहर निकाल दिया कि स्कूल के मामले में दखलंदाजी करने की उन्हें कोई जरूरत नहीं है, जिसके विरोध में छात्रायें हिसार के लघु सचिवालय पहुंची और अपना विरोध दर्ज कराया।
केन्द्र की तरह हरियाणा में भी भाजपा सत्ता पर काबिज है, जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का राजनीतिक संगठन है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) देश में वही आचार संहिता लागू करना चाहता है, जिसकी वकालत मनुस्मृृति करती है। आखिर संघ के मुख्य सिद्धांतकार व दूसरे प्रमुख नेता सदाशिव गोवलकर ने मनुस्मृति को दुनिया का सबसे महान आचार संहिता घोषित किया था।
इसके अलावा इस अभियान के तहत मैला ढ़ोने वालों के पक्ष में किसी प्रकार की सुरक्षा की कोई घोषणा तक सरकार द्वारा नहीं की गई है। बड़े नालों व सीवर की सफाई के लिए किसी प्रकार की नई तकनीक के इस्तेमाल के लिए कोई धन आवंटित नहीं किया गया, जिससे इन सफाई कर्मियों को कुछ राहत मिलती। और तो और लाखों की संख्या में ठेके पर काम कर रहे सफाई कर्मियों को स्थायी करने की घोषण भी नहीं की गई। सफाईकर्मियों की नई भर्तियों की कोई योजना तक नहीं लाई गई। इस तरह से स्वच्छ भारत अभियान, वास्तव में सफाई में लगे सफाई कर्मियों से अपनी दूरी बनाये रखा।
इसके अलावा स्वच्छ भारत अभियान की घोषणा के तुरन्त बाद 20 नवम्बर को हरियाणा के हिसार जिले के गांव रावलवास खुर्द में गर्ल्स हाई स्कूल की हेड टीचर ने अनुसूचित जाति की छात्राओं को शौचालय साफ करने का फरमान सुनाया। स्कूल की हेड टीचर ने तर्क दिया कि क्योंकि ये सभी छात्रायें मुफ्त में छात्रवृत्ति लेती हैं और पूरे भारत में स्वच्छ भारत अभियान चल रहा है। इसलिए अनुसूचित जाति की छात्रायें स्कूल के शौचालय साफ करेंगीं। जब छात्राओं और परिजनों ने स्कूल पहुंच कर इसका विरोध किया तो उन्हें यह कह कर स्कूल से बाहर निकाल दिया कि स्कूल के मामले में दखलंदाजी करने की उन्हें कोई जरूरत नहीं है, जिसके विरोध में छात्रायें हिसार के लघु सचिवालय पहुंची और अपना विरोध दर्ज कराया।
केन्द्र की तरह हरियाणा में भी भाजपा सत्ता पर काबिज है, जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का राजनीतिक संगठन है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) देश में वही आचार संहिता लागू करना चाहता है, जिसकी वकालत मनुस्मृृति करती है। आखिर संघ के मुख्य सिद्धांतकार व दूसरे प्रमुख नेता सदाशिव गोवलकर ने मनुस्मृति को दुनिया का सबसे महान आचार संहिता घोषित किया था।