Thursday, November 3, 2011

तुमसा प्यार कहाँ से लायें

 तुमसा प्यार कहाँ से लायें

जिस धरती का सूरज गुम है
उस पर छावं कहाँ से लायें 

बिन पानी के जी लें मछली
ऐसा  जीवन कहाँ से लायें

बिन चाँद चांदनी मिल जाये जहाँ पर
ऐसी रातें कहाँ से लायें

जीवन का ये रूप अनोखा
जीवन मरता है रोज यहाँ, बस....

साँसों पे सरकता जीवन है
जीवन का उल्लास कहाँ से लायें

हर चीज यहाँ पर प्यारी है पर....
तुमसा प्यार कहाँ से लायें

                      हेम लता





किसी ने कहा
लोग प्यार के लिए होते हैं
और चीजें इस्तेमाल के लिए 
लेकिन ............
ये नहीं बताया कि केवल अपने लोग ही 
प्यार के लिए होते हैं 
पराये नहीं, 
और प्यार लोग अपनों से ही करते हैं
किसी पराये से नहीं 
किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता  कि
कौन रोता  है अकेले में 

हेम लता