Monday, February 27, 2012

एक चीज जो उसके पास थी मेरी
उसने मुझको लौटा दी है
अब उम्मीद है की....
कुछ चीजें जो जाँ से प्यारी
वहां पास तुम्हारे छूट गयी हैं
वो फिर से शायद मिल सकती हैं
कुछ अपना सा  छूट गया वहां जो,
वो शायद फिर मिल सकता है,
मेरे घर का आंगन,
जो तेरे आंगन में छूट गया था,
हो सकता है उस आंगन में फिर से
मिल बैठ  कर बतियाएं हम
उजली रातों का चाँद अभी तक,
उस आँगन को ढूंढ रहा है,
मेरे पास नहीं कुछ मेरा,
जो कुछ था सब तेरा था .   
सुबह की मस्त पवन का झोंका
अब तक तुमको बुला रहा है,
बस कुछ दिन का इंतजार है
उसको भी बीत जाने का इंतजार है.

                             हेम लता

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